Skip to main content

धर्म के साथ मज़ाक नहीं...

ऐसा कहते हैं मेरे दोस्त। मेरे दोस्त जो किसी का मज़ाक बनाने से पहले, कोई नियम तोड़ने से पहले कभी ये नहीं सोचते की दूसरों पर उनकी हरकतों का क्या प्रभाव पड़ेगा। वो क्यों चाहते हैं कि मैं उन्हें समझूँ, उनके बारे में खयाल करूं।

उनका ये मानना की धर्म से ऊपर कोई नहीं और धर्म का मज़ाक नहीं बनाया जा सकता बिल्कुल ही गलत और बेतुका है। क्योंकि जिस मॉडर्न लाइफस्टाइल में जीने का वो दावा करते हैं वो कभी न कभी किसी स्तर पर धर्म और संस्कृति को चुनौती दे कर ही इस अवस्था पर आया है।

हर विचार की आलोचना की जा सकती, सबको आज़ादी है। जब हम समाज, राजनीति, विज्ञान, आदि के मुद्दों पर सवाल खड़े कर सकते हैं तो धर्म पर क्यों नहीं। अगर कोई धर्म को सवाल नहीं करना चाहता तो सिर्फ एक बेवकूफ इंसान है।

Comments

Popular posts from this blog

They ask me: Why are you an atheist?

I am actually no theist. That simply makes me an atheist. There are many reason I can enumerate but does that really matters. I think, no. As we don't ask anyone like why are you a christian or a moslem or a hindu etc. but why is that for an atheist? Does any of the arguments is really important for the person asking question. If yes, then I am ready to reason why I came to the default position of atheism. My only condition to share is that if you could rationally verify my arguments then read it otherwise close this blog and browse another page.