धर्म के साथ मज़ाक नहीं...

ऐसा कहते हैं मेरे दोस्त। मेरे दोस्त जो किसी का मज़ाक बनाने से पहले, कोई नियम तोड़ने से पहले कभी ये नहीं सोचते की दूसरों पर उनकी हरकतों का क्या प्रभाव पड़ेगा। वो क्यों चाहते हैं कि मैं उन्हें समझूँ, उनके बारे में खयाल करूं।

उनका ये मानना की धर्म से ऊपर कोई नहीं और धर्म का मज़ाक नहीं बनाया जा सकता बिल्कुल ही गलत और बेतुका है। क्योंकि जिस मॉडर्न लाइफस्टाइल में जीने का वो दावा करते हैं वो कभी न कभी किसी स्तर पर धर्म और संस्कृति को चुनौती दे कर ही इस अवस्था पर आया है।

हर विचार की आलोचना की जा सकती, सबको आज़ादी है। जब हम समाज, राजनीति, विज्ञान, आदि के मुद्दों पर सवाल खड़े कर सकते हैं तो धर्म पर क्यों नहीं। अगर कोई धर्म को सवाल नहीं करना चाहता तो सिर्फ एक बेवकूफ इंसान है।

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